Skip to main content

COVID 19 INDIA GOVT

कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के पांच सबसे कारगर उपाय



मास्क पहने युवतियांइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है. पूरी दुनिया में इसे लेकर पैनिक की स्थिति देखने को मिल रही है.
हर दिन हज़ारों नए मामले सामने आ रहे हैं जबकि सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है. दुनिया भर के कई शहरों और पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति देखने को मिल रही है.
दुनिया भर में हवाई उड़ानें, अंतरराष्ट्रीय इवेंट और सालाना जलसे रद्द किए जा रहे हैं.
यूरोप इस बीमारी का नया केंद्र बनकर उभरा है जबकि लैटिन अमरीका, अमरीका और मध्य पूर्व के देशों में संक्रमण फैलने की दर प्रतिदिन बढ़ रही है.
24 मार्च तक कोरोना वायरस के संक्रमण से 16,700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 3,87,000 से ज्यादा संक्रमण देखने को मिले हैं.



कोरोनावायरस हो तो ले सकते हैं ब्रूफ़ेन?

संक्रमण पर अंकुश

हालांकि कुछ देश इस वायरस के संक्रमण के प्रसार पर अंकुश लगा पाने में कामयाब रहे हैं.
अजीब संयोग यह है कि ये वैसे देश हैं जो भौगोलिक तौर पर चीन से नजदीक स्थित एशियाई देश हैं. इस वायरस की शुरुआत चीन से ही हुई थी.
लेकिन चीन के पड़ोसी देश इस वायरस के संक्रमण पर अंकुश लगाने में कामयाब दिख रहे हैं.
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में महामारी रोगों के विशेषज्ञ टॉलबर्ट नेन्सवाह ने बीबीसी को बताया, "कुछ देश हैं जिन्होंने इसे फैलने पर अंकुश लगाया है, उनसे हम सबको सीखना चाहिए. मैं केवल चीन की बात नहीं कर रहा, जिसने आक्रामक तौर तरीकों से इस पर अंकुश लगाया है. हालांकि उन तौर तरीकों को लोकतांत्रिक देशों में लागू करना संभव नहीं होगा. लेकिन दूसरे देश भी हैं जिन्होंने दूसरे कारगर तरीकों का इस्तेमाल किया है."

मास्क पहने लोगइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

कोरोना वायरस के संक्रमण

उदाहरण के लिए चीन के पड़ोस में 2.36 करोड़ की आबादी वाले ताइवान में 24 मार्च तक कोरोना वायरस संक्रमण के 215 मामले सामने आए थे जबकि केवल दो मौतों की पुष्टि हुई थी.
75 लाख की आबादी वाले हॉन्ग कॉन्ग में 386 मामले सामने आए हैं और दो महीनों के दौरान चार लोगों की मौत हुई है. हालांकि, बीते एक सप्ताह के दौरान यहां संक्रमण के मामले में तेज़ी आई है. अकेले 24 तारीख़ को 101 नए मामले सामने आए हैं.
12 करोड़ की आबादी वाले जापान में 24 मार्च तक 1140 मामले सामने आए हैं जबकि दक्षिण कोरिया में 9037 मामले सामने आए हैं. इन दोनों देशों में हाल के सप्ताह में संक्रमण और मौत, दोनों मामलों में कमी देखने को मिली है.
महामारी रोगों के विशेषज्ञ टॉलबर्ट नेन्सवाह के मुताबिक़, इन देशों ने कोरोना वायरस के संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए कारगर प्रावधानों को तेजी से लागू किया.

जांचइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

इन देशों में लागू किए पांच सबसे कारगर प्रावधान ये रहे हैं-

1. जांच, जांच और फिर से जांच

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक़ इस महामारी के प्रसार को रोकने की दिशा में सबसे अहम कारक इसकी शुरुआती पहचान है.
बीबीसी ने जिन विशेषज्ञों से बात की, वे भी इसकी पुष्टि करते है. नेन्सवाह के मुताबिक, "कितने लोग संक्रमित हैं, ये जाने बिना आप ना तो इसके असर के बारे में जान सकते हैं और ना ही आप कारगर क़दम उठा सकते हैं."
अमरीका के टेंपल यूनिवर्सिटी के इपिडिमिलॉजी की प्रोफ़ेसर क्रायस जॉनसन इससे सहमत हैं. उनके मुताबिक यह सबसे ज्यादा अंतर पैदा करने वाला कारक है, जिन देशों ने जांच कराने पर जोर दिया वहां नए मामलों में कमी देखने को मिली, जिन देशों में जांच कराने पर जोर नहीं दिया गया वहां संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े.



दिल्ली के पहले कोरोना मरीज़ ने बाक़ी मरीज़ों से क्या कहा?

क्रायस ने बीबीसी से बताया, "दक्षिण कोरिया ने प्रतिदिन दस हजार लोगों का परीक्षण किया, इसका मतलब यह है कि अमरीका ने पूरे महीने में जितने लोगों की जांच की, उससे ज्यादा लोगों की जांच दक्षिण कोरिया ने दो दिन में कर ली थी."
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एढॉनॉम गेब्रेयेसुस ने भी कहा है कि इस महामारी को रोकने में सबसे अहम कारक शुरुआती लक्षण वाले लोगों की जांच ही है.
उन्होंने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम सभी देशों को यही संदेश दे रहे हैं- जांच, जांच, जांच. हर देश को सभी संदिग्ध मामलों की जांच करनी चाहिए- इससे आंख मूंदकर वे इस महामारी का सामना नहीं कर सकते."
ज़्यादातर जगहों में गंभीर लक्षण देखे जाने के बाद ही कोरोना संक्रमण की जांच की जा रही है, इसको लेकर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ट्रेडोस ने दुनिया भर के देशों को चेताया है. उन्होंने कहा जिनमें शुरुआती लक्षण भी पाए जाएं उनकी जांच होनी चाहिए, तभी इसके संक्रमण पर अंकुश लगाना संभव होगा.

प्रतीकात्मक तस्वीरइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

2. संक्रमित मरीज को एकांत में रखना

प्रोफ़ेसर क्रायस जॉनसन बताती हैं, "मरीजों की पहचान, जांच और उन्हें एकांत में रखने की दिशा में दक्षिण कोरिया और चीन ने शानदार काम किया है." उनके मुताबिक जांच से संक्रमित शख्स को एकांतवास में भेजने में मदद मिलती है, साथ ही महामारी के प्रसार पर भी अंकुश लगता है. इतना ही नहीं इससे नए मामलों की जल्दी पहचान होने में भी मदद मिलती है.
क्रायस जानसन के मुताबिक चीनी अधिकारियों ने नए मामलों की पहचान के लिए अत्यधिक सक्रियता दिखाई और इसके चलते ही संक्रमण के मामलों में वहां कमी देखने को मिली है.
क्रायस जॉनसन ने बताया, "उच्च ज्वर से पीड़ित लोगों को फ़ीवर क्लीनिक भेजा गया और उनके फ्लू और कोविड-19 की जांच की गई. अगर टेस्ट में कोविड-19 पॉज़िटिव पाया गया तो उन्हें एकांतवास में रखा गया, इसे क्वारेंटाइन होटल्स कहा जाता था, ताकि वे अपने परिवार वालों के संपर्क में नहीं आ सकें."



कोरोना के वैक्सीन की तैयारी

ताइवान, सिंगापुर और हॉन्ग कॉन्ग ने दूसरा रास्ता अपनाया- वहां संदिग्ध मरीजों को उनके घरों में भी एकांतवास में रखा गया. इस नियम को तोड़ने वालों पर तीन हज़ार डॉलर जुर्माने का प्रावधान किया गया.
नेन्सवाह के मुताबिक इस रणनीति के चलते वे संभावित मरीजों पर नज़र रखने में कामयाब हुए. नेन्सवाह ने ये भी बताया है कि ताइवान और सिंगापुर में संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों पर नज़र रखी गई. ऐसा संक्रमित लोगों से बातचीत के आधार पर किया गया.
उन्होंने कहा, "12 मार्च को हॉन्ग कॉन्ग में 445 संदिग्ध मामले सामने आए थे, लेकिन वहां इन सभी लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों को मिलाकर 14,900 लोगों की जांच की गई, 19 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे."

मास्क पहने एक शख़्सइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

3. तैयारी और त्वरित कार्रवाई

नेन्सवाह खुद पश्चिम अफ्रीका में इबोला वायरस के संक्रमण पर अंकुश लगाने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं. उनके मुताबिक़ किसी भी वायरस पर अंकुश लगाने का सबसे प्रभावी तरीका, संक्रमण फैलने से पहले त्वरित रफ्तार से अंकुश लगाने के लिए कारगर क़दम उठाना होता है.
उन्होंने कहा, "ताइवान और सिंगापुर जैसे देशों ने नए मामलों की पहचान और उन्हें अलग थलग रखने के लिए त्वरित कार्रवाई की, यह महामारी के संक्रमण पर अंकुश लगाने वाला निर्णायक कदम साबित हुआ."
अमरीकी मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि ताइवान में कोरोना संक्रमण की रोकथाम में कामयाबी की सबसे बड़ी वजह इस देश का ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए तैयार होना था. ताइवान में ऐसी किसी महामारी पर अंकुश लगाने के लिए 2003 में ही कमांड सेंटर स्थापित किया गया था.
इस सेंटर के तहत कई रिसर्च करने वाली संस्था और सरकारी एजेंसी काम करती हैं. इसकी स्थापना सार्स के ख़तरे के दौरान की गई थी और इसके बाद इसने ऐसी चुनौतियों से निपटने का कई बार अभ्यास किया है और कई शोध किए हैं.



Corona Virus ने किस तरह से Italy की शक्लो-सूरत बदल दी है?

नेन्सवाह बताते हैं, "कारगर कदम उठाने के लिए तैयार होना और शुरुआती चरण में ही प्रभावी तरीकों को अपनाना महत्वपूर्ण रहा. यूरोप और अमरीका में, हम देख रहे हैं कि देशों में ना तो तैयारी थी और कारगर कदम उठाने में भी देरी हुई."
मध्य जनवरी में कोरोना वायरस के पर्सन टू पर्सन संक्रमण फैलने का मामला सामने आया था, इससे पहले ही ताइवान ने वुहान से आने वाले सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दिया था. हॉन्गकॉन्ग ने अपने सभी बंदरगाहों पर ज्वर मापने वाले स्टेशन को तीन जनवरी से ही चालू कर दिया था.
यहां विदेश से आने वाले सभी यात्रियों को 14 दिनों तक एकांत में रखने की व्यवस्था भी की गई. वहीं चिकित्सकों से बुखार-श्वसन संबंधी मुश्किलों और वुहान के इलाक़े से लौटने वाले सभी मरीजों के बारे में रिपोर्ट करने का आदेश दिया था. नेन्सवाह के मुताबिक़, हॉन्ग कॉन्ग में भी समय रहते उठाए गए क़दम कारगर साबित हुए.

ऑस्ट्रेलिया के सांसद दूरी बनाकर बैठे नज़र आएइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
Image captionऑस्ट्रेलिया के सांसद दूरी बनाकर बैठे नज़र आए

4. सोशल डिस्टैंसिंग

नेन्सवाह बताते हैं, "जब एक बार संक्रमण आपके देश में प्रवेश कर गया तब रोकथाम का कोई उपाय कारगर नहीं रह जाता है." ऐसी स्थिति आने पर आबादी को इसकी चपेट में आने से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका सोशल डिस्टैंसिंग है- ऐसा हॉन्ग कॉन्ग और ताइवन के उदाहरणों से भी जाहिर होता है.
हॉन्ग कॉन्ग ने जनवरी महीने में ही अपने लोगों को 'वर्क फ्रॉम होम' करने को कहा, सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया और सभी तरह के सामाजिक आयोजनों पर रोक लगा दी गई.
द स्ट्रेट टाइम्स समाचार पत्र के मुताबिक सिंगापुर ने अपने स्कूलों को बंद नहीं किया लेकिन छात्रों और अकैडमिक स्टाफ की प्रतिदिन जांच और निगरानी की व्यवस्था अपनाई.

हाथ साफ़ करती महिलाइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

5. साफ़ सफ़ाई के प्रति जागरूकता बढ़ाना

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने की दिशा में नियमित तौर पर हाथ धोना और स्वच्छता से रहना बेहद ज़रूरी कदम है.
नेन्सवाह बताते हैं, "कई एशियाई देशों को 2003 के सार्स संकट से सीखने को मिला था. इन्हें मालूम था कि साफ़ सफ़ाई से लोग बीमार नहीं होते और दूसरों में संक्रमण फैलने की आशंका भी कम होती है."
सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग और ताइवान की गलियों में 'एंटी बैक्ट्रियल जेल' वाले स्टेशन मौजूद हैं, जहां से लोग खुद को सैनिटाइज़ कर लेते हैं. इसके अलावा इन देशों में मास्क पहनने का चलन भी है. हालांकि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिहाज से मास्क पहनना हमेशा कारगर तरीका नहीं है लेकिन इसकी मदद से छींकने और खांसने के चलते होने वाले संक्रमण के ख़तरे को कम किया जा सकता है.

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी






कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव



कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

दुनिया भर में कोरोना वायरस से अब तक तीन लाख सेज़्यादालोगों की जान जा चुकी है. साथ ही संक्रमण के मामले भी बढ़कर44 लाख 43 हज़ार से ज़्यादा हो गए हैं.
इस वायरस से संक्रमित मरीज़ों में ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी शामिल थे, लेकिन इलाज के बाद वो ठीक हो चुके हैं और अब काम पर लौट गए हैं.
हम आपको यहां बता रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण कैसे फैलता है और इससे बचने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं.
कोरोना वायरस आपके फेफड़ों को संक्रमित करता है. इसके दो मूल लक्षण होते हैं बुख़ार और सूखी खांसी. कई बार इसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में भी दिक्कत पेश आती है.
कोरोना के कारण होने वाली खांसी आम खांसी नहीं होती. इस कारण लगातार खांसी हो सकती है यानी आपको एक घंटे या फिर उससे अधिक वक्त तक लगातार खांसी हो सकती है और 24 घंटों के भीतर कम से कम तीन बार इस तरह के दौरे पड़ सकते हैं. लेकिन अगर आपको खांसी में बलग़म आता है तो ये चिंता की बात हो सकती है.
इस वायरस के कारण शरीर का तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है जिस कारण व्यक्ति का शरीर गर्म हो सकता है और उसे ठंडी महसूस हो सकती है. व्यक्ति को शरीर में कंपकंपी भी महसूस हो सकती है.
इसके कारण गले में खराश, सिरदर्द और डाएरिया भी हो सकता है. हाल में आए एक ताज़ा शोध के अनुसार कुछ खाने पर स्वाद महसूस न होना और किसी चीज़ की गंध का महसूस न होना भी कोरोना वायरस का लक्षण हो सकता है.
माना जा रहा है कोरोना वायरस के लक्षण दिखना शुरु होने में औसतन पांच दिन का वक्त लग सकता है लेकिन कुछ लोगों में ये वक्त कम भी हो सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वायरस के शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखने के बीच 14 दिनों तक का समय हो सकता है.

कब होती है अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत?

जिन लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण है उनमें से अधिकतर लोग आराम करने और पैरासिटामॉल जैसी दर्द कम करने की दवा लेने से ठीक हो सकते हैं.
अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत तब होती है जब व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत आनी शुरू हो जाए. मरीज़ के फेफड़ों की जांच कर डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं कि संक्रमण कितना बढ़ा है और क्या मरीज़ को ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की ज़रूरत है.
लेकिन इसमें मरीज़ को अस्पताल के आपात विभाग यानी ऐक्सीडंट ऐंड इमर्जेंसी में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं होती.
भारत में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की वेबसाइट पर कोरोना संक्रमण से जुड़ी हर जानकारी दी गई है. ब्रितानी नागरिक एनएचएस111 की वेबसाइट पर कोरोना से जुड़ी सभी जानकारी ले सकते हैं.
अगर मरीज़ को सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है तो वो भारत सरकार के हेल्पलाइन नंबर +91-11-23978046 या फिर 24 घंटों चलने वाले टोल फ्री नंबर 1075 पर संपर्क कर सकते हैं. देश के विभिन्न राज्यों ने भी नागरिकों के लिए हेल्पलाइन शुरु किए हैं जहां ज़रूरत पड़ने पर फ़ोन किया जा सकता है.
वहीं ब्रिटेन में इमर्जेंसी की स्थिति में व्यक्ति 999 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं.

इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में क्या होता है?

इंटेंसिव केयर यूनिट अस्पताल के ख़ास वार्ड होते हैं जहां गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को रखा जाता है.
यहां कोरोना वायरस के मरीज़ों के ऑक्सीजन की ज़रूरत को मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगा कर या फिर नाक में ट्यूब के ज़रिए पूरा किया जाता है.
जो लोग गंभीर रूप से बीमार हैं उन्हं वेंटिलेटर पर रखा जाता है. यहां सीधे फेफड़ों तक ऑक्सीजन की अधिक सप्लाई पहुंचाई जाती है. इसके लिए मरीज़ के मुंह में ट्यूब लगाया जाता है या फिर नाक या गले में चीरा लगा कर वहां से फेफड़ों में ऑक्सीजन दिया जाता है.

कोरोना वायरस

कितना घातक है कोरोना वायरस?

कोरोना वायरस के संक्रमण के आँकड़ों की तुलना में मरने वालों की संख्या को देखा जाए तो ये बेहद कम हैं. हालांकि इन आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन आंकड़ों की मानें तो संक्रमण होने पर मृत्यु की दर केवल एक से दो फ़ीसदी हो सकती है.
फ़िलहाल कई देशों में इससे संक्रमित हज़ारों लोगों का इलाज चल रहा है और मरने वालों का आँकड़ा बढ़ भी सकता है.
56,000 संक्रमित लोगों के बारे में एकत्र की गई जानकारी आधारित विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक अध्ययन बताता है कि -
  • 6 फ़ीसदी लोग इस वायरस के कारण गंभीर रूप से बीमार हुए. इनमें फेफड़े फेल होना, सेप्टिक शॉक, ऑर्गन फेल होना और मौत का जोखिम था.
  • 14 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के गंभीर लक्षण देखे गए. इनमें सांस लेने में दिक्क़त और जल्दी-जल्दी सांस लेने जैसी समस्या हुई.
  • 80 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के मामूली लक्षण देखे गए, जैसे बुखार और खांसी. कइयों में इसके कारण निमोनिया भी देखा गया.

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बूढ़ों और पहले से ही सांस की बीमारी (अस्थमा) से परेशान लोगों, मधुमेह और हृदय रोग जैसी परेशानियों का सामना करने वालों के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका अधिक होती है.
कोरोना वायरस का इलाज इस बात पर आधारित होता है कि मरीज़ के शरीर को सांस लेने में मदद की जाए और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि व्यक्ति का शरीर ख़ुद वायरस से लड़ने में सक्षम हो जाए.
कोरोना वायरस का टीका बनाने का काम अभी चल रहा है.

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो आपको कुछ दिनों के लिए ख़ुद को दूसरों से दूर रहने की सलाह दी जा सकती है.
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने कहा है कि जिन्हें लगता है कि वो संक्रमित हैं वो डॉक्टर, फार्मेसी या अस्पताल जाने से बचें और अपने इलाक़े में मौजूद स्वास्थ्य कर्मी से फ़ोन पर या ऑनलाइन जानकारी लें.
जो लोग दूसरे देशों की यात्रा करके ब्रिटेन लौटे हैं उन्हें सलाह दी गई है कि वो कुछ दिनों के लिए ख़ुद को दूसरों से अलग कर लें.



क्या कोरोना वायरस कोविड 19 पहला ऐसा वायरस है जिसे पैन्डेमिक कहा गया है?

दूसरे देशों ने भी इस वायरस से बचने के लिए अपने अपने देशों में स्कूल कॉलेज बंद करने और सर्वजनिक सभाएं रद्द करने जैसे क़दम उठाएं हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी लोगों के लिए एहतियात बरतने के तरीक़ों के बारे में जानकारी जारी की है.
संक्रमण के लक्षण दिखने पर व्यक्ति को अपने स्थानीय स्वास्थ्य सेवा अधिकारी या कर्मचारी से संपर्क करना चाहिए. जो लोग बीते दिनों कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं उनकी जांच की जाएगी.
अस्पताल पहुंचने वाले सभी मरीज़ जिनमें फ्लू (सर्दी ज़ुकाम और सांस लेने में तकलीफ) के लक्षण हैं, स्वास्थ्य सेवा अधिकारी उनका परीक्षण करेंगे.
परीक्षण के नतीजे आने तक आपको इंतज़ार करने और दूसरों से खुद को दूर रखने के लिए कहा जाएगा.

खुद को कोरोना वायरस से कैसे बचाएं?




हाथों को सही से कैसे धोया जाए

कोरोना वायरस यानी 'कोविड 19' से बचने के लिए आप नियमित रूप से अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएं.
जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं. इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं.
संक्रमित व्यक्ति के नज़दीक जाने पर ये विषाणुयुक्त कण सांस के रास्ते आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं.
अगर आप किसी ऐसी जगह को छूते हैं, जहां ये कण गिरे हैं और फिर उसके बाद उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं तो ये कण आपके शरीर में पहुंचते हैं.
ऐसे में खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करना, बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार फेस मास्क इससे प्रभावी सुरक्षा प्रदान नहीं करते.

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

कितनी तेज़ी से फैल रहा है कोरोना वायरस?

रोज़ दुनिया भर में कोरोना वायरस के सैकड़ों मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन ये भी माना जा रहा है कि अब भी कई मामले स्वास्थ्य एजेंसियों की नज़र से बच गए होंगे.
जॉन हॉप्किन्स युनिवर्सिटी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार दुनिया के करीब 187 देशों में अब तक कोरोना वायरस के संक्रमण के 36.65 लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है और मरने वालों की संख्या दोलाख 57 हज़ार से ज़्यादा है.
इस वायरस के संक्रमण के सबसे अधिक मामले अमरीका, स्पेन, इटली, यूके और फ्रांस में सामने आए हैं.

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी


कोरोना वायरस हेल्प लाइनइमेज कॉपीरइटMOHFW_INDIA
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम
3 फरवरी 2020

  • कोरोना वायरस से चीन के बाहर पहली मौत
    2 फरवरी 2020
  • कोरोना वायरस ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी- WHO : पांच बड़ी ख़बरें
    31 जनवरी 2020












  • Publish Date:Fri, 08 May 2020 12:47 PM (IST)
    COVID-19: घर-दफ्तर और बाहर कैसे बचे कोरोना वायरस से, यहां लीजिए हर जानकारी
    COVID-19 वायरोलॉजिस्ट डॉ. देब प्रसाद चट्टोपाध्याय का कहना है कि आगामी कुछ दिनों में यह सामान्य फ्लू की तरह हो जाएगा और हमें इसके साथ जीवन जीने की आदत डालनी होगी।
    नई दिल्‍ली, जेएनएन। COVID-19: लॉकडाउन 3 शुरू हो चुका है। इसमें सरकार की ओर से कई गतिविधियों के लिए छूट दी गई है। जिससे लोग अपने दैनिक कामकाज को बेहतर ढंग से निपटा सकें। हालांकि इस दौरान हमें कई तरह की सावधानियां रखने की भी जरूरत है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिन के निदेशक और जाने-माने वायरोलॉजिस्ट डॉ. देब प्रसाद चट्टोपाध्याय का कहना है कि कोरोना वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है।
    आगामी कुछ दिनों में यह सामान्य फ्लू की तरह हो जाएगा और हमें इसके साथ जीवन जीने की आदत डालनी होगी। इन आदतों को हम कुछ एहतियाती कदमों के जरिए सुनिश्चित कर सकते हैं। ऐसे ही कुछ कदमों को जानते हैं, जिनके जरिए आप अपना जीवन सुरक्षित रखते हुए दैनिक गतिविधियों को बिना किसी डर के पूरा कर सकते हैं।
    सुरक्षा अधिकार है आपका : कोरोना वायरस के लक्षण हर किसी में दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे में इन लक्षणों को लेकर आपको सतर्क रहने की जरूरत है। आपके आसपास कोई भी व्यक्ति कोविड-19 का वाहक हो सकता है और आपको संक्रमित कर सकता है। आप खुद भी कोविड-19 के वाहक हो सकते हैं। इसलिए खुद को इस तरह से प्रशिक्षित कीजिए कि न आप किसी को संक्रमित करें और न ही आप किसी के द्वारा संक्रमित हो
    ऑफिस में ये बातें रखें याद
    • ई-मीटिंग को प्रमुखता दें
    • ऑफिस में एक जगह से दूसरी जगह पर जाने से बचें
    • एक बार ऑफिस के अंदर जाने के बाद बार-बार अंदर-बाहर जाने से बचे
    • यदि कांफ्रेंस रूम मीटिंग हो तो शारीरिक दूरी रखें और कम से कम लोग हों
    • घर का खाना लेकर जाएं, अपने स्थान पर खाएं और बचे हुए खाने का जिम्मेदारी से निस्तारण करें
    ऑफिस में अपनाएं ये चार नियम
    • सीढ़ियों से आने-जाने की आदत डालें
    • यदि लिफ्ट में जाना हो तो भी शारीरिक दूरी बनाएं
    • दरवाजे खोलने के लिए कोहनी का इस्तेमाल करें
    • यदि आपने किसी सतह जैसे लिफ्ट बटन, दरवाजों के हैंडल को छुआ है तो अपने हाथों को लगातार सैनिटाइज करते रहे
    ऑफिस से जब घर जाएं
    • नहा लें
    • हाथों को अच्छी तरह से धोएं
    • रास्ते में मास्क लगाएं रखें
    • जूतों को घर के बाहर खोलें और प्रवेश करने से पहले बैग को बाहर रखें
    घर से करें शुरुआत 
    • मास्क लगाकर रखें
    • हमेशा अपने पास सैनिटाइजर रखें
    • बाहर से आने वाले सदस्यों से शारीरिक दूरी बनाकर रखें
    • तापमान लें, यदि बुखार हो तो डॉक्टर से संपर्क करें, घर पर रहें
    • अपनी कार या दूसरे वाहन को छू रहे हैं तो सैनिटाइजर का प्रयोग करें
    सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें तो 
    • यात्रा से पूर्व अपने हाथों को सैनिटाइज करें
    • सुनिश्चित करें कि वाहन चालक दल के सदस्यों सहित सभी यात्री मास्क पहनें
    • सुनिश्चित करें कि शारीरिक दूरी बनी रहे (एक व्यक्ति प्रत्येक पंक्ति की प्रत्येक ओर जिग-जैग तरीके में रहें)
    • एसी को बंद रखें और ताजी हवा के लिए खिड़कियां खोल दें
    हमेशा यह याद रखें थूकें नहीं
    • गीली अंगुलियों से पेज न पलटें, न नोट आदि गिनें
    • किसी के साथ भी भोजन, पानी और ऑफिस स्टेशनरी साझा न करें
    • भीड़भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें, हाथ न मिलाएं, नमस्ते सबसे बेहतर अभिवादन
    • हाथों पर कफ न आने दें (खांसते या छींकते वक्त कोहनी या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें)
    ऐसे करें बैग या जूतों को सैनिटाइज
    • असंक्रमित करने वाले सोल्यूशन का प्रयोग करें (इससे पहले ठीक से निर्देशों/सावधानियों को पढ़ें) या फिर एंटीसेप्टिक लिक्विड का इस्तेमाल कर सकते हैं
    • इसके लिए ऑफ्टर शेव लोशन, डिओडोरेंट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिसमें एल्कोहल की मात्रा 65 फीसद से अधिक हो इसके बाद में हाथों को धो लें
    यदि आप राशन या दवाई लेने जाते हैं तो
    • अपने साथ बैग लेकर जाएं, प्रवेश स्थान पर ही सारे पैकेट्स निकालें, सैनिटाइज करें और सामग्री निकालें
    • सब्जियों को सफेद विनेगर में धोएं, पानी का घोल 1:4 के अनुपात में हो
  • Comments